कैसा होता अगर ऐसा होता ?

क्या आपने कभी सोचा है  कैसा होता अगर ऐसा होता की द्रौपदी का हरण ही नहीं हुआ होता, अगर रावण ही नहीं पैदा होता, मीरा कृष्ण को न चाहती और गोपियाँ पीछे न आती । कैसा होता अगर राम की जगह रावण , कौरवों की जगह पांडव होते ? अगर सीता स्वंयवर में राम पराजित होते ? अगर शिव -पार्वती कभी एक न होते ?
सच कहूँ तो यह सब सोचना मेरी समझ  के तो परे है ।
बचपन में नानी-दादी से कई कहानियाँ  सुनी हैं । कुछ कहानियाँ मन में इस तरह छप गईं की आज भी याद हैं और अगर किसी बच्चे को सुनाकर सुलाने को कहा जाए तो नानी- माँ को थैंक्यू कहना चाहूँगी । बहुत सी कहानियाँ पसंद आईं जिसमें  से एक कहानी थी जब हनुमान जी अपने एक हाथ पर ही पूर्ण पहाड़ उठा लाते हैं और लक्ष्मण जी के प्राणों की रक्षा करते हैं । इस कहानी का प्रथम रुप
मैंने सबसे पहले एक मंदिर में मूर्ति के रुप में देखा पर उसकी पूर्ण कहानी तो नानी माँ ने एक रात सुनाई । सोचो अगर लक्ष्मण जी को कभी नाग पाश लगा ही  न होता तो हनुमान जी भी संजीवनी  ढूँढने न जाते और ना ही पूरा पहाड़ उठा लाते, और अगर वह खाली हाथ वापस आ जाते तो ? तो क्या फिर लक्ष्मण जी राम और सीता की कहानी का हिस्सा होते ? हनुमान कभी बलशाली कहलाते ? और अगर दस सिर वाला ज्ञानी रावण न होकर राम जी होते और रावण-सीता साथ होते तो ?
यह सब सोचने पर शायद हँसी आ रही होगी और इनके उत्तर तो मेरे पास भी नहीं है मगर इन सब बातों से एक बात ज़रूर समझ आती है कि जो आज है कल ही की वजह से है और यह केवल कहानियाँ ही नहीं ये हमारे सोचने-समझने का आधार है। रावण दस सिर वाला कहलाता है तो ऐसा ही मान लिया । यही आधार है और यही  हर व्यक्ति का विश्वास है । भगवान न होते तो उम्मीद किस से होती ? अगर ऐसा होता तो कैसा होता ?

लेखिका : रितिका कक्कड़

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