मन चाहता है ।

कभी हँसी पर आता है गुस्सा, कभी सारे जग को हँसाने का मन चाहता है। कभी डूबता नहीं मन किसी के डूबने पर, चीखने चिल्लाने को मन चाहता है कभी। अच्छा लगता है कभी पंछी - सा उड़ना, नए रिश्तों में मन बंधने को चाहता है कभी। भली होती है दुनिया की रंगीनी कभी, कभी... Continue Reading →

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